संदेश

ये जो ज़ुल्फ़ काले काले है

ये जो ज़ुल्फ़ काले काले है | जाने कितनो को मार डाले है || उनकी आँखों से ज़रा दूर ही रहियो, ज़ालिम ने क़ातिलों को पाले है || कभी आबाद था ये दिल का मकाँ, अब फ़क़त मकड़ियों के जाले है || उसके लिए हर एक दिन है होली, जिसे देखे है, इश्क़ में रंग डाले है || तारीख़ :  15-Apr-1994

कहने को तूफ़ां से भी टकरा गए

कहने को तूफ़ां से भी टकरा गए | लेकिन निगाह-ए-यार से घबरा गए || ग़मों की तिजोरी भरी थी अभी, अश्कों के मोती लो फिर आ गए || अभी तुमको देखा निगाहें मिली, इतने में ही तुम तो शर्मा गए || तारीख़ : 5 -Jan-1998

ज़िंदगानी ही तो है

ज़िंदगानी ही तो है | बितानी ही तो है || मुहब्बत का क्या, कहानी ही तो है || ढल जाएगी यूँ ही, जवानी ही तो है || मेरा टूटा हुआ दिल, निशानी ही तो है || अश्क़ क्यूँकर बहाऊँ, पानी ही तो है || मौत से क्या डरना, आनी ही तो है || 'नज़र' देखती है उन्हें, दीवानी ही तो है || तारीख़ :  19-Feb-2014

तुम साथ चलोगे जो मेरे साथ दो क़दम

तुम साथ चलोगे जो मेरे साथ दो क़दम | तो वादा रहा कि साथ ना छोड़ेंगे तेरा हम || इक रोज़ मुलाक़ात हुई उनसे राह पर, अब रोज़ गुज़रते है उन्ही रास्तों से हम || शब्-ए-फ़िराक में इतना उकता गया है जी, क्या करें गर वस्ल की ख्वाइश न करें हम || मिटता है दर्द-ए-दिल दवा-ए-विसाल सें, सीनें में रगड़ने से क्या फायदा मरहम || मेरी क़िस्मत में उनके हाथों लिखीं हैं ज़फाएँ, नाराज़ हो तो ज़्यादा, मेहरबान हो तो कम || अब याद करके तुझको न रोएंगे बार बार, अब पहरों इत्मिनान से सोया करेंगे हम || 'नज़र' का हाल इन दिनों बुझा बुझा सा है, और नींद भी कुछ आजकल आने लगी है कम || तारीख़ : 14-Oct-1994

उन्हें देखते ही पलक दोनों बंद हो गए

उन्हें देखते ही पलक दोनों बंद हो गए | और वो मेरी नज़रों में नज़रबंद हो गए || बच के मेरे जी से भला जाओगे किधर तुम, रस्ते तमाम दिल के मेरे बंद हो गए || अपना बनाना हमने तुझे सोचा था पहले, अब और ज़्यादा हौसले बुलंद हो गए || कहते थे न आज़माना अपनी 'नज़र' को तुम, घट कर चाहने वाले तेरे चंद हो गए || तारीख़ : 31-March-1997