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मुहब्बत क्या है, सिखाऊंगा तुम्हे

मुहब्बत क्या है, सिखाऊँगा तुम्हे । कभी मिलने तो आओ, दिखाऊँगा तुम्हे ।। कभी भूले भी, न छेड़ना मुझको, अपनी बारी में, रुलाऊंगा तुम्हे ।। बहुत दिन छोड़ के न जाना हमको, फिर मिले, तो काट खाऊंगा तुम्हे ।। आज कर लो सितम जो करना है, किसी दिन उँगलियों पे नचाऊँगा तुम्हें ।। लिख के रखी है हर बात जो तुमसे करनी है, कभी फुर्सत से बैठो तो बताऊंगा तुम्हे ।। अपनी खिड़की की चटखनो को रखना खोले, कोई रात मिलने आऊँगा तुम्हें ।। हर रोज़ तुम्हे देखना पेड़ो की ओट से, एक-तरफ़ा मुलाक़ात बताऊंगा तुम्हे ।। तमाम दर्द ‘नज़र’ दिल में लिए बैठा हूँ, ना तुम पूछोगे, ना मैं बताऊँगा तुम्हें ।। (16-फ़रवरी-2020)