ज़िंदगानी ही तो है

ज़िंदगानी ही तो है |
बितानी ही तो है ||

मुहब्बत का क्या,
कहानी ही तो है ||

ढल जाएगी यूँ ही,
जवानी ही तो है ||

मेरा टूटा हुआ दिल,
निशानी ही तो है ||

अश्क़ क्यूँकर बहाऊँ,
पानी ही तो है ||

मौत से क्या डरना,
आनी ही तो है ||

'नज़र' देखती है उन्हें,
दीवानी ही तो है ||

तारीख़ : 19-Feb-2014



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ये जो ज़ुल्फ़ काले काले है

नज़र मिलाऊँ तो क़ैसे

मुहब्बत क्या है, सिखाऊंगा तुम्हे