कभी दिन में ख्व्वाब देखा, कभी माहताब देखा

कभी दिन में ख्व्वाब देखा, कभी माहताब देखा।
हम हो गए दीवाने, जो तेरा शबाब देखा ।।

निकली थी मुँह  से आहें, पलटी थी जब निगाहें,
वो मुस्कुरा के बोले, मेरा जवाब देखा ।। 

यादों को तेरी जाना, मुश्किल है भलू पाना,
होकर खराब देखा, पीकर शराब देखा ।।

कोठे पे जब वो आई, चाँदनी भी मुस्कुराई,
कहा माहताब ने भी, मैंने माहताब देखा ।।

ले दे के प्यार बांटा, सौदे में निकला घाटा,
लगा के जब भी हमने, दिल का हिसाब देखा ।।


तारीख़ : 30 -Oct-1994

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